B.A. Part 2 Education Notes

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 मापन के आवश्यक तत्व 

1- गुणों को पहचानना तथा परिभाषित करना -> किसी व्यक्ति या वस्तु के गुणों को पहचान कर उसकी व्याख्या       करना ही गुणों का मापन होता है  जैसे > मेज अथवा कमरे की लंबाई, बालक की बुद्धि तथा सर्जनात्मक,     शारीरिक तापकर्म किशोर की संवेगात्मक परिपक्वता रुचि इत्यादि।  

2- गुणों का मापन करने वाले औजारों को निश्चित करना ->  किसी बालक के अंदर के गुणों को देखना मापन होता है  तो हम उसी के अंदर के स्रोतों अथवा औजारों को देखते है।  तो हम उस के  गुणों  का  मापन सही तरीके से कर पाए गे। 

3- गुणों की संख्या मे व्यक्त करना ->  जिस परिणाम की उचित तथा उपयोगी स्रोतों के उपयोग से प्राप्ती होती है ।  उस को संख्या मे व्यक्त किया जाता है।  ba education notes


मापन की अवधारणा 


मानव की सभ्यता के विकास मे जैसे जैसे विज्ञान की उन्नती हुई ।  वैसे ही वैसे मापन विधियों का भी विकास होता गया ।  ba education notes

रांस महोदय ने मापन की महत्ता पर प्रकास  डालते हुए लिखा है की "मापन के सभी यंत्र यदि संसार से लुप्त कर दिए जाए तो आधुनिक सभ्यता बालू की दीवाल की तरह भर-भराकर गिर जाएगी । 

आधुनिक उन्नति के साथ ही साथ स्थूल विषयो  तथा पदार्थों के अलावा छोटे एवं अमूर्त व्यवहार, भावनाओ और सामाजिक संबंधों के कई क्षेत्रो मे मापन क्रिया का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है । 


मानसिक एवं भौतिक मापन मे निम्न अंतर है 

1- मानसिक मापन की प्रक्रती सापेक्षिक होती है ।  ba education notes

2- लेकिन भौतिक मापन की प्रक्रती निरपेक्ष  होती है । 

3- मानसिक मापन मे अंकों का स्वत: कोई महत्व नहीं होता । 

4- भौतिक मापन मे अंक बहुत अधिक महत्वपूर्ण  होते है । ba education notes


            मानसिक मापन, भौतिक मापन की अपेक्षा अत्यधिक परिवर्तनिय होते है ।  उदाहरण  > अगर एक कमरे की लंबाई एक वर्ष के पश्चात भी मापे तो हम उस मे बिल्कुल  भी बदलाव नहीं कर पाएगे।  ba education notes

            जब की एक बालक की बुद्धि आज मापे तथा एक वर्ष के बाद मापे तो बुद्धिलब्धि मे निश्चित रूप से भिन्नता पाए गे, क्योंकि बालक की बुद्धि पर समय, अभ्यास परिपकता एवं स्मृती का भी प्रभाव पड़ता है ।  ba education notes


मापन की त्रुटिया 

त्रुटिया करना मनुष्य का स्वभाव है । हर एक व्यक्ती जीवन मे प्रती दिन जाने अन जाने मे कई तरह की त्रुटिया करता है , जिन मे से कुछ त्रुटिया उस के स्वभाव की वजह से तो कुछ दशाओ एवं कुछ विशिष्ट तरह के कारकों की वजह से घटित हो जाती है । मापन चाहे भौतिक हो अथवा मानसिक दोनों ही दशाओ मे त्रुटि की संभावनाए रहती है इतना जरूर है की भौतिक वस्तुओ के मापन मे त्रुटि की मात्रा, मानसिक शक्तियों के मापन त्रुटि की अपेक्षा काम रहती है । 





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